Bhagvad Gita - Lesson 14 - Suggested Answers

 

Q1) What is the size of the soul and where is it situated ?
The size of the soul is described as one ten-thousandth part of the upper portion of the hair point in size. The influence of the soul is spread all over the body & it's presence can be felt as consciousness.

Q2) What are the six transformations of the body ?
2) The body is subject to six kinds of transformations. It takes its birth from the womb of the mother's body, remains for some time, grows, produces some effects, gradually dwindles, and at last vanished into oblivion.

Q3) Explain the two kinds of souls in the heart?
There are 2 kinds of souls - Atomic Soul (jivatma) and SuperSoul(Paramatma). These souls are situated on the same tree of the body within the heart of the living beings, only one who becomes free from all the material desires by the grace of the supreme can understand the glories of these souls.

Q4) Violence also has its utility?Explain with examples?
Any act of violence committed to prevail justice in the community has its utility & is beneficial provided it is conducted with full knowledge of the same. For example, a Judge who orders capital punishment for a murderer in order to maintain justice & peace.

 

 

१.आत्मा का आकार क्या हैं और यह कहां स्थित हैं?

बाल के अग्रभाग की एक सौ भागों में विभाजित किया जाए और फिर इनमें से प्रत्येक भाग को एक सौ भागों में विभाजित किया जाए तो इस तरह के प्रत्येक भाग की माप आत्मा का परिमाप है आत्मा हृदय में स्थित है

२.शरीर के छः प्रकार के रूपांतरण क्या हैं?

वह माता के गर्व से जन्म लेता कुछ काल तक रहता है,बढ़ता है,कुछ परिणाम उत्पन करता है,धीरे धीरे क्षीण होता है और अंत में समाप्त हो जाता है।किन्तु आत्मा में ऐसा परिवर्तन नहीं होता है

३.हृदय में आत्मा के दो प्रकार की व्याख्या कीजिए।

हृदय में आत्मा के दो प्रकार हैं- १.अणु आत्मा २.विभु आत्मा।ये दोनों ही हमारे हृदय में रहते हैं। यदि हम समस्त इच्छाओं और शोको से मुक्त हो जायेंगे तभी भगवत कृपा से आत्मा की महिमा को समझ सकते हैं|

४.हिंसा की भी अपनी एक उपयोगिता है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
हिंसा की भी अपनी उपयोगिता है और इसका प्रयोग इसे जानने वाले पर निर्भर करता है। जैसे अगर कोई डाक्टर किसी मरीज का आपरेशन करता है तो वह उसको बचाने के लिए न कि उसे मारने के लिए।
यादीपी हत्या करने वाले व्यक्ति को न्यायसंहिता के अनुसार प्राण दंड दिया जाता है किन्तु न्यायाधीश को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है क्युकी वो न्यायासंहिता के अनुसार ही दूसरे व्यक्ति पर हिंसा किए जाने का आदेश देता है। मनुसंहिता में इसका समर्थन किया गया है कि हत्यारे को प्राण दंड देना चाहिए जिससे उसे अगले गीवन अपना पाप कर्म भोगना ना पड़े.अतः कभी कभी हिंसा भी अनिवार्य है।

Request For Callback

Thank you ! We will get to you soon.

Couldn't submit your request.