Bhagvad Gita - Lesson 15 - Suggested Answers

1) Explain the shloka " Vasamsi jirnani....?
As a person puts on new garments,giving up old ones,the soul similarly accepts new material bodies,giving up the old and useless ones.

2) Explain the shloka " Nainam chindanti...?

A) The soul can never be cut to pieces by any weapon,nor burned by fire,nor moistened by water,.nor withered by the wind.

3) Explain ' Sarva - gata' ? Can some soul live in fire ?
It means all-pervading which implies that the living entities are all over the creation of God i.e on land,in water,in air,within the earth and even within fire.Since the soul cannot be burned by fire it can live in fire.

4) There is no source of understanding the identity of the father except by the authority of the mother? Please explain?
The identity of the soul can only be understood by the study of the Vedas since it is inconceivable by human experimental knowledge.Just like the identity of father lies only with the mother,there are many things we have to accept SOLELY on grounds of SUPERIOR AUTHORITY.

5) Why is repetition of something necessary?
Repetition of something is necessary in order that we understand the matter thoroughly, without error.

6) What is amazing about the soul ? What happens to a person who understands this ?
The atomic soul can be within gigantic body of an animal or banyan tree and also within small microbic germs. This is truly amazing and one who understands this,then one has his life successful.

 

 

१."वासा॑सि जीर्णानि" श्लोक का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नये वस्त्र धारण करता है,उसी प्रकार आत्मा पुराने तथा व्यर्थ के शरीरों को त्यागकर नवीन भौतिक शरीर धारण करता है।

२."नैनऺ छिन्दनि्त " श्लोक की व्याख्या कीजिए। 

आत्मा को न तो किसी शस्त्र द्वारा खण्ड खण्ड किया जा सकता है,न अग्नि द्वारा जलाया जा सकता है,न जल द्वारा भिगोया या वायु द्वारा सुखाया जा सकता है।

३.सर्वगत शब्द का अर्थ बताइए। क्या अग्नि में भी आत्मा निवास करती हैं?

सर्वगत शब्द का अर्थ है कि जीव भगवान की समग्र सृष्टि में फैले हुए हैं। चूंकि आत्मा को अग्नि द्वारा जलाया नहीं जा सकता अतः अग्नि में भी आत्मा निवास करती हैं।

४.माता के प्रमाण के अलावा पिता की पहचान को समझने का अन्य कोई स्रोत नहीं है। कृपया स्पष्ट कीजिए।

पिता के स्वरूप को समझने का एकमात्र साधन माता है। दूसरा कोई उपाय नहीं है। श्रुति को माता कहा गया है।उसी प्रकार आत्मा को समझने का एकमात्र साधन शास्त्र हैं।

५. कुछ बात को दुहराना क्यों आवश्यक है?

कुछ बातों को दुहराना उसके महत्व को दर्शाता हैं। एवं बिना किसी त्रुटि के हमें उसको स्वीकार करना चाहिए।

६.आत्मा के बारे में आश्चर्य क्या हैं? यदि कोई इसे समझ लेता है तो क्या होता हैं?

आत्मा को देख पाना मुश्किल है।एक बडे जानवर के शरीर मे,एक बडे वृक्ष में,एक छोटे बैक्टीरिया में भी है।यह आश्चर्य की बात है।जो इसे समझ लेता है वह बड़ा भाग्यवान है।उसका जीवन सफल हो जाता है।

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