Bhagvad Gita - Lesson 18 - Suggested Answers

Q1) What is Samadhi ?
Samadhi means "fixed mind." The Vedic dictionary, the Nirukti, says, samyag adhiyate 'sminn atmatattva-yathatmyam: "When the mind is fixed for understanding the self, it is called samadhi. "

Q2) What do Vedas ultimately teach us ? What is Vedanta ?
Vedas helps in raising us from the 3 modes of material nature i.e mode of goodness, mode of passion and mode of ignorance ,to the highest transcendental level.They guide us in progressing towards self- realization.Slowly and gradually Vedas uplifts us from the bodily conception to the soul conception.It takes us to the level where we can understand ,Who are we?,Who is Bhagavan?,What is our relationship with the lord?,which is also called Brahma jijnasa i.e Enquiry into the absolute truth. Vedanta means 'end of understanding of all the Vedas'.In this age of Kali, most of the population is foolish and not adequately educated to understand Vedanta philosophy; the best purpose of Vedanta philosophy is served by inoffensively chanting the holy name of the Lord.

Q3) Who is Chaitanya Mahaprabhu ? What did he teach ?
Lord Chaitanya, the deliverer of all fallen souls, is Lord Krishna in his most merciful feature. When lord Krishna wished to bestow mercy on all living beings He appeared as Chaitanya Mahaprabhu.Chaitanya Mahaprabhu bestowed so much power in Krishna's name, that whoever chants the holy name of the Lord inoffensively can gain all the Vedanta knowledge very easily.He opened the doors of divine love to all by chanting and singing the glories of Krishna in the form of Kirtans.His teachings indicate that everyone should strive towards realizing the ultimate truth, which is acceptance of the fact that Krishna is the only blessing to be received.

Q4) What are Prescribed duties ( Karm ), Capricious work ( Vikarm ), and Inaction ( Akarm ) ? What did Lord Krishna advise Arjuna on this ?
Prescribed duties refer to activities performed while one is in the modes of material nature. Capricious work means actions without the sanction of authority, and Inaction means not performing one's prescribed duties. The Lord advised that Arjuna not be inactive, but that he perform his prescribed duty without being attached to the result. One who is attached to the result of his work is also the cause of the action. Thus he is the enjoyer or sufferer of the result of such actions.

Q5) What is the meaning of Yoga ?
Yoga means to concentrate the mind upon the Supreme by controlling the ever-disturbing senses.The following of Krsna's dictation is real yoga, and this is practiced in the process called Krsna consciousness.

 

1. समाधि का अर्थ क्या है?

समाधि का अर्थ है 'स्थिर मन'। वैदिक शब्दकोश निरुक्ति के अनुसार - सम्यग आधीयतेसsस्मिन्नातत्त्वयाथात्म्यम - जब मन आत्मा को समझने में स्थिर रहता है उसे समाधि कहते हैं।

2. वेद आखिर हमें क्या सिखाते हैं? वेदांत क्या है?

वेदो में मुख्यतः सकाम कर्म का वर्णन है जिससे सामान्य जन क्रमशः इन्द्रियतृप्ति के क्षेत्र से उठकर आध्यात्मिक धरातल तक पहुंच सके। वेद अध्ययन का ध्येय जगत के आदि कारण भगवान् कृष्ण को जानना है। वेद हमें शरीर के स्तर से आत्मा के स्तर तक ले आते हैं। वेदांत का मुख्य स्रोत उपनिषद है जो वेद ग्रंथो और वैदिक साहित्य का सार समझे जाते हैं। उपनिषद् वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है, इसीलिए इसको वेदान्त कहते हैं।वेदांत समझना मतलब सारे वेदो का अंत जान जाना।

3. चैतन्य महाप्रभु कौन हैं? उन्होंने हमें क्या सिखाया?

चैतन्य महाप्रभु भगवान् कृष्ण के विस्तार हैं। चैतन्य प्रभु बहुत ही दयालु हैं , कृष्णा प्यारे हैं । जब कृष्णा ने निश्च्य की में सब जीवो का उधर करूँगा तो उन्होंने स्वयं को चैतन्य महाप्रभु के रूप में  विस्तार किया और चैतन्य प्रभु ने कृष्णा नाम में वह शक्ति डाल दी जिसके शुद्ध मन के उच्चारण से ही मानवजीवन का उधार हो जायेगा।उन्हें वेदो और उपनिषदों के ज्ञान की कोई आवश्यकता नहीं हैं।

4. निर्धारित कर्मों(कर्म), संकेंद्रित कार्य(विकर्म), और निषि्क्रयता (अकर्म) क्या हैं? इस पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को क्या सलाह दी?

कर्म (स्वधर्म) वे कर्म है जिनका आदेश प्रकृति के गुणों के रूप में प्राप्त किया जाता है।  विकर्म अधिकारी की सम्म्मति के बिना किये गए कार्य विकर्म कहलाते हैं।  अकर्म अपने कर्मो को न करना ही अकर्म हैं। भगवान् कृष्ण ने अर्जुन को सलाह दी कि फलासक्ति रहित होकर कर्म (स्वधर्म) के रूप में युद्ध करो। और अकर्म पाप हैं ।

5. योग का अर्थ क्या है?

योग का अर्थ है सदैव चंचल रहने वाली इद्रियों को वश में रखते हुए परमतत्त्व में मन को एकाग्र करना। कृष्ण के आदेशों का पालन ही वास्तविक योग हैं और इसका अभ्यास कृष्णभावनामृत नामक विधि द्वारा किया जाता हैं।

 

Request For Callback

Thank you ! We will get to you soon.

Couldn't submit your request.