Bhagvad Gita - Lesson 23 - Suggested Answers

Q1) What is the difference between Sankhya yoga and Buddhi yoga?
Sankhya is the philosophy that can take you to Krishna consciousness but buddhi Yoga connects you Directly to Krishna. Sankhya yoga is the theoretical aspect whereas Buddhi Yoga is the practical aspect of Krishna consciousness.

Q2) What is the nature of soul as described in b.g 3.5?
The soul has to be always active. the soul has to be engaged in the good work of Kṛṣṇa consciousness, otherwise it will be engaged in occupations dictated by the illusory energy. it is necessary to engage in the prescribed duties enjoined in the śāstras.the process, is to help reach the ultimate goal of becoming Kṛṣṇa conscious, without which everything is considered a failure.

Q3) What is the benefit of doing devotion to Lord as described in S.B 1.5.17?

The Śrīmad-Bhāgavatam (1.5.17) affirms this: If someone takes to Kṛṣṇa consciousness, even though he may not follow the prescribed duties in the śāstras or execute the devotional service properly, and even though he may fall down from the standard, there is no loss or evil for him.

 

1. सांख्य योग और बुद्धि योग में क्या अंतर है?

सांख्य योग में हम आत्मा तथा पदार्थ की प्रकृति का अध्ययन करते हैं।ये लोग ज्ञान तथा दर्शन द्वारा वस्तुओं का मनन करते हैं। बुद्धि योग अर्थात कृष्णभावनामृत में समस्त इन्द्रियों को सरलता से वश में किया जा सकता है। इसमें मनुष्य कर्म के बंधन से छूट सकता है।

2. भगवद्गीता 3.5 में वर्णित आत्मा की प्रकृति क्या है?

इस श्लोक के अनुसार आत्मा का स्वभाव है सदा सक्रिय रहना। आत्मा की अनुपस्थिति में भौतिक शरीर हिल भी नहीं सकता। अतः आत्मा को सदैव कृष्णभावनामृत में लगाये रखना चाहिए। नहीं तो वह माया द्वारा शासित रहेगा।

3. श्री मद्भागवत 1.5.17 में वर्णित भगवान की भक्ति करने के क्या लाभ है?

यदि कोई कृष्णभावनामृत अर्थात भगवान की भक्ति करता है, सेवा करता है लेकिन किसी कारण वश अपने कर्तव्य का पालन न करे , शास्त्र के अनुसार कर्म न करें व पतित भी हो जाये तो उसमें उसकी कोई हानि या बुराई नहीं है। अपितु वह मृत्यु के बाद उसके आगे से भक्ति करेगा।

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