Bhagvad Gita - Lesson 8 - Suggested Answers

Lesson #8 - Answers

 

Q1) What were the signs of Victory for Arjuna?
A) The various signs of victory are : 1) Bhagvan Sri Krishna himself being with Arjuna, 2) The goddess of fortune Laxmi ji as she is always where her husband, Bhagvan Sri Krishna ji is. 3)The emblem of Hanuman on the flag of Arjuna as Hanuman has helped Lord Rama in the battle between Lord Rama and Ravana in which Lord Rama was victorious. 4) The blowing of different conch shells on the side of the Pandavas became uproarious that the Kauravas became disheartened and felt shattered.

Q2) How does Krishna take the orders of His devotees?
A) The relationship between the Lord and His servitor is very sweet and transcendental. The servitor is always ready to render service to the Lord, and, similarly, the Lord is always seeking an opportunity to render some service to the devotee.

 

Q3) What happens when one has excessive attachment for material things?
A) Excessive attachment for material things puts a man in such a bewildering condition of existence. such fearfulness and loss of mental equilibrium take place in persons who are too affected by material conditions

Q4) Where does our self interest lie? What happens when we forget our self interest?
A) One’s real self-interest lies in Viṣṇu, or Kṛṣṇa. The conditioned soul forgets this, and therefore suffers material pains.

 

 

Q1) अर्जुन की विजय के क्या चिन्ह थे?

युद्ध में पांडवों का निर्देशन स्वयम् भगवान कृष्ण कर रहे थे ।उन्हें भगवान कृष्ण की शरण मिल गई थी । अर्जुन की ध्वजा पर हनुमान जी का झण्डा था ,भगवान कृष्ण तो राम ही थे लक्ष्मी जी भी तो सदैव कृष्ण के साथ ही रहती हैं अत: इन सब का साथ पांडवों को मिल गया। अर्जुन के अस्त्र शस्त्र भी देवताओं के द्वारा दिए गए थे इसलिए शाश्वत भक्त अर्जुन की विजय के लक्षण दिख रहे थे।

Q2) कृष्णा अपने भक्तों की आज्ञा को कैसे स्वीकार करते हैं?

A) कृष्ण को अच्युत कहा गया है जो कभी भी हारता नहीं है कृष्ण के भक्त बन कर हम उनका प्र्ेम पा सकते हैं भगवान एक सेवक की तरह अपने भक्त की आज्ञा का पालन करते हैं जैसे सेवक स्वामी की सेवा में तत्पर रहता है वैसे ही भगवान सेवा के लिए तत्पर रहते हैं वह अपने भक्तों के अाधीन रहते हैं ।भक्तों की आज्ञा का पालन करके भगवान को दिव्यानन्द करी प्राप्ति होती है।

Q3) भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति के क्या परिणाम होते हैं?

A) भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति के कारण मनुष्य में धैर्य की कमी हो जाती है और भय तथा मानसिक असंतुलन के कारण उसे आत्मविसमृति हो जाती है वह मोहमयी स्थिति में पड़ जाता है।

Q4) हमारा स्वार्थ कहां हैं? क्या होता है जब हम अपना स्वार्थ भूल जाते हैं?

A) मनुष्य का वास्तविक स्वार्थ तो भगवान श्री कृष्ण में निहित हैं बद्ध जीव जब यह भूल जाते हैं तो उन्हें भौतिक कष्ट उठाने पड़ते है